DSP की चाय लेने गया कांस्टेबल श्याम बाबू लौटते लौटते बना SDM: DSP ने किया सॅल्यूट।


SUCCESS STORY 

अक्सर आपने सुना कि मेहनत करने वालों की हार नहीं होती है। वास्तव में यह सच है। अगर मेहनत और लगन से किसी चीज को पाने की कोशिश की जाए तो वह आखिर तक मिल ही जाती है। पर इसके अलावा किस्मत का भी भरपूर साथ होना चाहिए ।अक्सर कई लोग मानते हैं कि ये सिर्फ एक कहानी है और सिर्फ कहने की बात है। पर एक शख्स ने इस बात को शाबित  दिया कि अगर पूरी लगन से किसी चीज को पाने की कोशिश की जाए तो सफलता जरूर मिलती है

आज हमारे आसपास न जाने कितने ही लोग मौजूद हैं जिन्होंने रात दिन कड़ी मेहनत कर ऊंचा मुकाम हासिल किया । ऐसे लोगों की सक्सेस स्टोरीज हम अक्सर कहीं न कहीं पढ़ते और सुनते रहते हैं पर इसी दुनिया मे ऐसे लोग भी मौजूद हैं जो कड़ी मेहनत कर सफल तो हुए पर ज्यादा दिनों तक सफलता का स्वाद नहीं चख सके । आज हम ऐसे ही एक व्यक्ति की कहानी सुनाने जा रहे हैं जिसकी कभी सक्सेस स्टोरीज हर अखबार के पन्नों पर छपती थी पर वक्त की चाल ने उसे अर्श से फर्श पे ला फेंका

Motivational Story Of Shyam Babu

जिनके हौसले बुलंद होते हैं वो मेहनत करने से पीछे नहीं हटते और सफलता पाकर लोगों के लिए मिसाल बन जाते हैं. एक ऐसा ही नाम है यूपी के श्याम बाबू का, जिन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस में एक सिपाही के रूप में 14 साल तक नौकरी की. सरकारी नौकरी पाने के बावजूद पढ़ाई करना नहीं छोड़ी और SDM बने ।

हालांकि वो यह नौकरी ज्यादा दिनों तक नहीं कर पाए.  श्याम बाबू की नियुक्ति निरस्त कर दी गई है. अगस्त 2020 में कई स्तर पर हुई जांच में प्रमाण पत्र फर्जी साबित होने के बाद अपर मुख्य सचिव ने यह आदेश जारी किया था.

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14 साल यूपी पुलिस में रहे सिपाही

बलिया के छोटे से गांव इब्राहिमाबाद के रहने वाले श्याम बाबू ने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद साल 2005 में यूपी पुलिस में सिलेक्शन हो गया. एक सिपाही के रूप में नौकरी करते हुए वो अपनी पढ़ाई जारी रखी. साल 2008 में स्नातक की डिग्री हासिल की. ग्रेजुएशन के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन किया. इसके अलावा नेट भी क्वालीफाई किया. नौकरी करने के दौरान पढ़ाई के लिए समय निकालना बड़ा मुश्किल था, लेकिन वो पीछे नहीं हटे मेहनत के साथ पढ़ते रहे. उन्होंने अपने भाई को भी पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया, जो एक अधिकारी हैं. श्याम बाबू ने भी UPSC की परीक्षा पास करने की ठानी. उन्होंने अधिकारी बनने का सपना देख लिया था. इसके लिए मेहनत करते रहे.

श्याम ने एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘मैंने शुरू में थाने में नौकरी की लेकिन बाद में ऑफिस में आ गया. ऑफिस में आने से इस बात की सहूलियत हो गई कि दिन के वक्त दफ्तर का काम खत्म करता था और रात के वक्त में पढ़ाई भी हो जाती थी.’

 

UPSC 2016 की परीक्षा में 52वीं रैंक हासिल कर एसडीएम बने

 

 

दिलचस्प यह है कि जिस दिन श्याम का UPSC रिजल्ट आना था उसी दिन डिप्टी एसपी ने उन्हें चाय लाने के लिए भेजा. तभी उन्हें कॉल आया कि उन्होंने UPSC की परीक्षा पास कर ली. जब चाय लेकर अधिकारी के पास लौटे तो उन्हें यह खुशखबरी दी, अफसर ने उन्हें सैल्यूट किया.

 

 

UP के बलिया जिले के बैरिया तहसील क्षेत्र के इब्राहिमाबाद उपरवार के रहने वाले श्यामबाबू की कहानी किसी फिल्मी किस्से से कम नहीं है । गरीबी में बचपन काटने वाले श्यामबाबू ने कड़ी मेहनत कर साल 2005 में यूपी पुलिस में सिपाही की नौकरी पा ली तो मानो उनके परिवार के भाग्य खुल गए ।

सिपाही रहते हुए की पीसीएस की तैयारी

जहां घोर गरीबी की वजह से श्यामबाबू और उनकी बहनों की शिक्षा पूरी नहीं हो सकी। यही वजह थी कि दसवीं पास करते ही श्यामबाबू सरकारी नौकरियों के फार्म भरने लगे थे । इंटरमीडिएट पास श्यामबाबू को जब यूपी पुलिस में आरक्षी पद पर नौकरी मिली तो वह यहीं नहीं रुके । पढ़ने में तेज श्यामबाबू ने पुलिस की नौकरी करते हुए पीसीएस की तैयारी करने लगे

14 साल बाद रंग लाई मेहनत,बने एसडीएम

पुलिस में नौकरी करते हुए प्रयागराज में तैनाती के दौरान श्यामबाबू ने पीसीएस की न सिर्फ तैयारी की बल्कि रात दिन एक कर दिया। उनकी मेहनत रँग लायी और 14 साल के लंबे अंतराल के बाद आखिर श्यामबाबू पीसीएस परीक्षा पास करने में सफल रहे ।

साल 2016 में उन्होंने यूपीपीएससी की परीक्षा दी थी जिसका अंतिम परिणाम 2019 में आया । वह पीसीएस की अंतिम सूची में जगह बनाने में कामयाब रहे । उन्हें यूपीपीएससी में 52 वीं रैंक प्राप्त हुई थी । जिस वजह से उनका चयन एसडीएम पद पर हो गया। बता दें कि श्यामबाबू ने सिपाही की नौकरी करते हुए ही स्नातक पास किया था । उन्हें यह सफलता छठवीं बार परीक्षा में शामिल होने के बाद प्राप्त हुई थी।

जिस वक्त एसडीएम बने उस वक्त डीएसपी ने भेजा था चाय लेने

पुलिस में सिपाही की नौकरी करते हुए एसडीएम बन जाना एक बड़ी बात थी । इस खबर को कई अखबारों और वेबसाइटों में छापा गया और सक्सेस स्टोरीज लिखी गईं । कहा गया कि साल 2019 में जिस वक्त आरक्षी श्यामबाबू का चयन अंतिम रूप से पीसीएस के लिए हुआ उस वक्त वह पुलिस मुख्यालय में डीएसपी के सामने खड़े थे। डीएसपी ने उन्हें चाय लेने भेजा था वहीं टेबल पर रखे श्यामबाबू के फोन पर रिजल्ट आया था । चाय लेकर आने के बाद श्यामबाबू ने जब पीसीएस क्वालीफाई करने की सूचना सामने बैठे डीएसपी को दी तो उन्होंने खड़े होकर सिपाही श्यामबाबू को सैल्यूट किया था।

 

फर्जी जाति प्रमाणपत्र लगाने के आरोप में नियुक्ति हो गयी रद्द

सिपाही से जिले के तहसीलदार बनना श्यामबाबू के सपने पूरे होने जैसा था पर उनकी यह खुशी ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाई । वर्ष 2016 की पीसीएस परीक्षा में अंतिम रूप से चयनित होने के बाद श्यामबाबू की बतौर एसडीएम(परिवीक्षाधीन) तैनाती संतकबीरनगर जिले में थी । वहीं सिपाही से एसडीएम बने श्यामबाबू के बारे में विभाग को जानकारी हुई कि उन्होंने नौकरी में लाभ पाने के लिए गोंड जाति का फर्जी एसटी प्रमाणपत्र लगाया है । कई स्तरों पर उनके प्रमाणपत्रों की जांच हुई और इसमें लगाए गए आरोप सही पाए गए जिसके बाद साल 2020 में श्यामबाबू की एसडीएम पद पर नियुक्ति को रद्द कर दिया गया

 

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